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सुशीला ने इंटर में टॉप किया उत्तराखंड, हासिल किये 98% अंक, शेयर किया स्टडी रूटीन

रुद्रपुर: उत्तराखंड बोर्ड के इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम में रुद्रपुर की सुशीला मेहंदीरत्ता ने 98 प्रतिशत अंक हासिल कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है. उनकी इस उपलब्धि से परिवार, स्कूल और पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है.

उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के 12वीं परीक्षा परिणाम घोषित होते ही प्रदेशभर में खुशी की लहर दौड़ गई. इसी कड़ी में रुद्रपुर की रहने वाली सुशीला मेहंदीरत्ता ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है. सुशीला ने 500 में से 490 अंक प्राप्त कर यह उपलब्धि अपने नाम की है. उनके इस उत्कृष्ट प्रदर्शन से न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे स्कूल और क्षेत्र का नाम रोशन हुआ है.

सुशीला रुद्रपुर के भंजूराम अमर देव इंटर कॉलेज की छात्रा हैं. परिणाम घोषित होने के बाद जब वह अपने विद्यालय पहुंचीं तो स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों ने उनका जोरदार स्वागत किया. इस मौके पर मिठाई बांटी गई. शिक्षकों ने उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं. सुशीला की सफलता पर उनके सहपाठी भी बेहद उत्साहित नजर आए.

अपनी सफलता का श्रेय सुशीला ने अपने माता-पिता और गुरुजनों को दिया है. उन्होंने बताया उनके पिता योगेश मेहंदीरत्ता और माता ममता मेहंदीरत्ता भूरारानी क्षेत्र में एक छोटा सा बुटीक चलाते हैं. वे हमेशा उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित करते रहे हैं. साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने के बावजूद सुशीला ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर यह मुकाम हासिल किया है.

सुशीला ने बताया कि उन्होंने बिना किसी कोचिंग के यह सफलता प्राप्त की है. वह रोजाना करीब 4 घंटे नियमित रूप से पढ़ाई करती थीं. मोबाइल फोन का इस्तेमाल केवल पढ़ाई से संबंधित सामग्री के लिए करती थीं. उनका मानना है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो सफलता जरूर मिलती है.

परिवार में भी खुशी का माहौल है. उनके छोटे भाई अरुण, जो इसी स्कूल में 10वीं के छात्र हैं, ने भी 87.8 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं. यह परिवार के लिए दोहरी खुशी का अवसर बन गया है. गौरतलब है कि इस वर्ष बागेश्वर की गीतिका पंत ने भी प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है. जिससे प्रतियोगिता का स्तर और भी ऊंचा दिखाई देता है.

सुशीला की इस सफलता पर परिजनों, शिक्षकों और स्थानीय लोगों ने मिठाई खिलाकर और शुभकामनाएं देकर उनका उत्साह बढ़ाया. उनकी इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि कड़ी मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है.

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