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डॉ. गीता खन्ना का हरिद्वार दौरा: स्कूल निरीक्षण में शिक्षक की अभद्रता की शिकायत सही पाई गई

हरिद्वार: उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना द्वारा जनपद हरिद्वार के बहादराबाद स्थित सिकंदराबाद क्षेत्र में प्राप्त शिकायत के उपरांत संबंधित विद्यालय का स्थलीय निरीक्षण भी किया गया। निरीक्षण के दौरान विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षा विभाग के अधिकारियों, बच्चों एवं अभिभावकों से विस्तृत वार्ता की गई। जाँच में यह तथ्य प्रकाश में आया कि सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत एक शिक्षक द्वारा एक बच्चे के साथ मारपीट किए जाने एवं महिला स्टाफ के साथ अभद्र व्यवहार किए जाने की शिकायत प्रथम दृष्टया सत्य प्रतीत हुई।

उक्त प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए आयोग द्वारा संबंधित उच्चाधिकारियों को तत्काल एवं कठोर कार्यवाही सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया गया। आयोग ने विद्यालय परिसर में संचालित दो प्राथमिक विद्यालयों को प्रशासनिक दृष्टि से एकीकृत कर एक ही विद्यालय के रूप में संचालित किए जाने की आवश्यकता भी व्यक्त की। साथ ही विद्यालय परिसर में आंगनवाड़ी संचालन हेतु एक कक्ष उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, जिससे छोटे बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा एवं पोषण संबंधी सुविधाएँ बेहतर रूप से उपलब्ध कराई जा सकें। निरीक्षण के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) एवं विभागीय टीम भी उपस्थित रही।

डॉ गीता खन्ना के नेतृत्व में जनपद हरिद्वार के विभिन्न विद्यालयों एवं बच्चों के साथ एक व्यापक जागरूकता वेबिनार आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 8000 बच्चों ने सहभागिता की। अत्यधिक गर्मी, ईंधन की बचत तथा कम समय में अधिकाधिक बच्चों तक प्रभावी रूप से पहुँच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस वेबिनार का आयोजन किया गया।

वेबिनार के दौरान बच्चों को संबोधित करते हुए डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा, संरक्षण एवं उनके अधिकारों की रक्षा हेतु राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अनेक संस्थागत व्यवस्थाएँ सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उन्होंने बताया कि राज्य स्तर पर स्टेट कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स तथा राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स बच्चों के हितों की सुरक्षा एवं संरक्षण हेतु निरंतर कार्यरत हैं। प्रत्येक जनपद में गठित चाइल्ड वेलफेयर कमेटियाँ बच्चों की समस्याओं, चुनौतियों एवं शिकायतों के समाधान हेतु सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने यह भी अवगत कराया कि प्रत्येक पुलिस चौकी एवं थाने में बाल मित्र पुलिस एवं जुवेनाइल पुलिस यूनिट नामित की गई हैं, ताकि बच्चों को सुरक्षित, संवेदनशील एवं सहयोगात्मक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

डॉ. गीता खन्ना ने बच्चों से आह्वान किया कि वे शिक्षा, खेलकूद, नैतिक मूल्यों एवं व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान दें तथा अनुशासित जीवनशैली अपनाकर विकसित भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँ। उन्होंने कहा कि राष्ट्र का भविष्य बच्चों एवं युवाओं के हाथों में है तथा भारत को विश्वगुरु बनाने के संकल्प को साकार करने में नई पीढ़ी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों को चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 एवं इंटीग्रेटेड इमरजेंसी हेल्पलाइन 112 की विस्तृत जानकारी भी प्रदान की गई। उन्होंने बताया कि 1098 बच्चों के लिए 24 घंटे एवं वर्ष के 365 दिन संचालित निःशुल्क आपातकालीन सेवा है, जहाँ किसी भी प्रकार के शोषण, हिंसा, उत्पीड़न अथवा सहायता संबंधी सूचना दी जा सकती है। इसके अतिरिक्त बच्चों एवं अभिभावकों को मानसिक स्वास्थ्य सहायता हेतु मानस हेल्पलाइन तथा नशा मुक्ति एवं ड्रग दुरुपयोग रोकथाम से संबंधित ड्रग हेल्पलाइन के बारे में भी विस्तृत जानकारी प्रदान की गई, जिससे आवश्यकता पड़ने पर समय पर सहायता प्राप्त की जा सके।

आयोग की अध्यक्ष ने निर्देशित किया कि प्रत्येक विद्यालय में 1098 हेल्पलाइन, उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर एवं संबंधित चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) सदस्यों की जानकारी अनिवार्य रूप से प्रदर्शित की जाए। जिन विद्यालयों में यह व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, वहाँ तीन दिवस के भीतर फ्लेक्स बोर्ड स्थापित करने हेतु छात्र-शिक्षक समुदाय एवं विद्यालय प्रबंधन से सहयोग का आह्वान किया गया।

उन्होंने बच्चों से संवाद करते हुए कहा कि बचपन जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण एवं स्वर्णिम काल होता है, जिसमें व्यक्ति के चरित्र, कार्यशैली, अनुशासन एवं व्यक्तित्व की नींव रखी जाती है। विद्यालयों में समयबद्धता, अनुशासन एवं सकारात्मक वातावरण बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का आधार बनते हैं।

. गीता खन्ना द्वारा जनपद के जिलाधिकारी से भी विभिन्न विद्यालयों में प्राप्त अनियमितताओं एवं बच्चों से संबंधित शिकायतों के संबंध में विस्तृत वार्ता की गई। साथ ही नताशा सिंह एवं मुख्य शिक्षा अधिकारी को लंबित प्रकरणों में त्वरित जांच कर शीघ्र आख्या प्रस्तुत करने हेतु निर्देशित किया गया।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि बच्चों की सुरक्षा, सम्मान एवं गरिमा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा आयोग भविष्य में भी पूर्ण संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ कार्यवाही सुनिश्चित करता रहेगा।

इस अवसर पर आयोग के अनु सचिव डॉ. एस. के. सिंह भी उपस्थित रहे।

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