Saturday, August 30, 2025
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एसजीएचएस गोल्डन कार्ड योजना में लापरवाही पर कर्मचारी संगठन नाराज

सीएम से हस्तक्षेप की मांग

देहरादून: राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने राज्य कार्मिकों के अंशदान आधारित एसजीएचएस “गोल्डन कार्ड” योजना के क्रियान्वयन में देरी पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। परिषद ने मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव से इसमें शीघ्र हस्तक्षेप कर व्यवस्था को पटरी पर लाने की मांग की है।

मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव से तत्काल हस्तक्षेप की अपील

परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अरुण पांडे ने कहा कि पूर्व में यह योजना कुप्रबंधन का शिकार रही, जिसके कारण राज्य कार्मिकों को इसका उचित लाभ प्राप्त नहीं हो सका। राज्य कार्मिकों और पेंशनरों को माननीय न्यायालय की शरण में जाने के लिए बाध्य होना पड़ा। वर्तमान में यह योजना सरकार की अनदेखी का शिकार हो रही है।

उन्होंने आगे कहा कि पूर्व में अपर मुख्य सचिव कार्मिक उत्तराखंड शासन की अध्यक्षता में हुई बैठक में परिषद द्वारा यह मांग रखी गई थी कि चूंकि यह योजना अंशदान आधारित है, और इसमें कार्मिक चिकित्सा प्रतिपूर्ति के भी हकदार हैं।

अतः सरकार को कार्मिकों के अंशदान के अतिरिक्त चिकित्सा प्रतिपूर्ति पर आने वाले अतिरिक्त व्यय को वहन करना चाहिए। इस पर तत्समय के अपर मुख्य सचिव और वर्तमान में मुख्य सचिव उत्तराखंड शासन ने अपनी सैद्धांतिक सहमति भी दी थी।

परिषद ने यह भी बताया कि उत्तराखंड सरकार ने 2025-26 के बजट में इस हेतु कोई धनराशि निर्धारित नहीं की है, जो कि अत्यंत आपत्तिजनक है।
इसके परिणामस्वरूप, देश-प्रदेश के प्रमुख अस्पतालों जैसे कि मेदांता अस्पताल गुरुग्राम, महंत इंदिरेश देहरादून, और हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट सहित अन्य कई अस्पतालों ने गोल्डन कार्ड योजना से हाथ खींच लिया है।

परिषद के प्रदेश महामंत्री शक्ति प्रसाद भट्ट ने कहा कि सरकार के जिम्मेदार अधिकारी केवल कार्मिकों के अंशदान से ही उनका उपचार करा रहे हैं, जबकि पूर्व में बगैर अंशदान दिए राज्य सरकार के बजट से चिकित्सा प्रतिपूर्ति का भुगतान किया जाता था। इससे यह प्रतीत होता है कि सरकार अपनी ओर से कोई अंशदान इस योजना में नहीं देना चाहती, जो उचित नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि कई अस्पतालों द्वारा उपचार में खर्च को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया जा रहा है, जिससे व्यय भार अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया है। अपर मुख्य सचिव कार्मिक की अध्यक्षता में पूर्व में हुई बैठक में यह भी तय किया गया था कि इस वृद्धि की समीक्षा की जाएगी, लेकिन इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई।

परिषद ने कहा कि अपुष्ट सूत्रों से यह जानकारी मिली है कि राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को समय-समय पर अवगत कराया गया था कि कुछ अस्पतालों की ओवर बिलिंग की शिकायतें हैं, और ऐसे अस्पतालों के फर्जी उपचार के देयकों का भुगतान रोका जाए।

मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव से तत्काल दखल देने की अपील
परिषद के प्रदेश अध्यक्ष एवं महामंत्री ने प्रदेश के मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से इसमें तत्काल दखल देने की मांग की है। परिषद का आरोप है कि यह प्रतीत हो रहा है कि राज्य के कार्मिकों के लिए लाभकारी यह गोल्डन कार्ड योजना बंद करने की योजना कुछ अधिकारियों की ओर से बनाई जा रही है।

परिषद ने प्रदेश सरकार से यह भी मांग की है कि राज्य सरकार अपने स्तर से पूर्व की भांति इस योजना में चिकित्सा प्रतिपूर्ति हेतु बजट स्वीकृत करे और राज्य कार्मिकों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लंबित देयकों का तत्काल भुगतान सुनिश्चित कराए। साथ ही, इस योजना को और अधिक सुदृढ़ बनाने का प्रयास किया जाए।

 

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