देहरादून: देहरादून स्थित एक किड्स प्ले स्कूल परिसर में कथित रूप से सेक्स रैकेट जैसी अत्यंत गंभीर एवं घिनौनी गतिविधियों के संचालन संबंधी समाचार पत्रों एवं प्राप्त सूचनाओं का उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने गंभीर संज्ञान लिया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि यह घटना न केवल अत्यंत शर्मनाक एवं निंदनीय है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा व्यवस्था एवं समाज की नैतिक मर्यादाओं पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। विद्यालय जैसे पवित्र एवं संवेदनशील स्थानों का इस प्रकार की अवैध गतिविधियों में उपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं किया जा सकता।
आयोग द्वारा जिलाधिकारी देहरादून को पत्र प्रेषित कर उक्त प्रकरण की निष्पक्ष, गहन एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित करते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही यदि किसी स्तर पर प्रशासनिक अथवा संस्थागत लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों एवं संस्थान प्रबंधन के विरुद्ध भी आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
आयोग द्वारा निम्न बिंदुओं पर विशेष रूप से आख्या एवं कार्यवाही रिपोर्ट मांगी गई है —
*1. नई शिक्षा नीति के अंतर्गत की जा रही कार्यवाहियों की आख्या*
आयोग ने मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) से नई शिक्षा नीति के अंतर्गत जनपद में बच्चों की सुरक्षा, विद्यालयीय मानकों एवं निजी शिक्षण संस्थानों की निगरानी हेतु किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
*2. मदरसा बोर्ड भंग होने के उपरांत जारी निर्देशों की स्थिति*
आयोग ने मदरसा बोर्ड के बंद होने के उपरांत जारी किए गए दिशा-निर्देशों एवं उनके अनुपालन की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी प्रकार से बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा एवं अधिकार प्रभावित न हों। साथ ही संबंधित दिशा-निर्देशों की प्रति आयोग को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
*3. अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण संबंधी दिशा-निर्देश*
आयोग ने अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण द्वारा जारी समस्त शिक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों एवं मानकों की प्रतियां आयोग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, जिससे शिक्षण संस्थानों की कार्यप्रणाली एवं सुरक्षा मानकों की प्रभावी समीक्षा की जा सके।
*4. किराये के मकानों में संचालित विद्यालयों एवं संस्थानों की जांच*
आयोग ने किराये के मकानों एवं कमरों में संचालित विद्यालयों, प्ले स्कूलों एवं अन्य शिक्षण संस्थानों की गहन जांच कराने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति विद्यालय की आड़ में इस प्रकार की आपराधिक एवं अनैतिक गतिविधियां संचालित कर सकता है, तो भविष्य में ऐसे संस्थानों द्वारा अभिभावकों से धनराशि लेकर फरार होने अथवा बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ किए जाने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
उक्त बिंदुओं पर आयोग शिक्षा विभाग के साथ बैठक कर ,विभाग से आख्या लेगा जिससे सभी पर उपयुक्त कार्यवाही की जा सके ।
आयोग ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग बच्चों के हितों की रक्षा हेतु प्रदेश की सर्वोच्च मॉनिटरिंग एजेंसी होने के नाते समस्त शिक्षण संस्थानों एवं संबंधित व्यवस्थाओं पर सतत एवं प्रभावी निगरानी बनाए रखेगा। डॉ. गीता खन्ना ने CBSE बोर्ड परीक्षा में सफल हुए समस्त छात्र-छात्राओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि बच्चों की मेहनत, शिक्षकों के मार्गदर्शन एवं अभिभावकों के सहयोग से प्राप्त यह सफलता अत्यंत सराहनीय है। आयोग ने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें निरंतर आगे बढ़ने एवं समाज एवं राष्ट्र निर्माण में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
आयोग ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा एवं विद्यालयों की गरिमा बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए तथा भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु कठोर एवं प्रभावी व्यवस्था विकसित किया जाना अत्यंत आवश्यक है। उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग इस पूरे प्रकरण को अत्यंत गंभीरता से देख रहा है तथा आवश्यकतानुसार आयोग स्तर से भी अग्रिम कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।


