पटना : बिहार विधानसभा में आज मुखिया को हथियार लाइसेंस की अनुमति नहीं मिलने का मामला उठा. उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक आलोक सिंह ने सदन में कहा कि पंचायत स्तर पर मुखिया की भूमिका बेहद संवेदनशील होती है.
जमीन विवाद, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और स्थानीय झगड़ों के चलते मुखिया को अक्सर धमकियों का सामना करना पड़ता है. कई मामलों में उन पर जानलेवा हमले भी हुए हैं. ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार ने खुद मुखिया को आर्म्स लाइसेंस देने का निर्णय लिया था, तो फिर अब तक यह प्रक्रिया क्यों लंबित है?
सम्राट चौधरी ने 7 दिनों का दिया वक्त : सहयोगी दल के विधायक के सवाल पर गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि सात दिनों के भीतर राज्य के सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी किए जाएंगे. इन निर्देशों के तहत मुखिया के आवेदन, पुलिस सत्यापन और सुरक्षा आंकलन की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा.
”जांच पूरी होने के बाद योग्य और जरूरतमंद मुखियाओं को आर्म्स या पिस्टल लाइसेंस दिए जाएंगे. सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि लाइसेंस केवल उन्हीं मुखिया को मिले, जिन्हें वास्तव में सुरक्षा की आवश्यकता है. किसी भी तरह की मनमानी या गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जाएगी.”– सम्राट चौधरी, गृह मंत्री, बिहार
अभी तक टाल मटोल रवैया क्यों? : हालांकि विपक्षी सदस्यों का कहना था कि सरकार की मंशा सही नहीं है. पंचायत चुनाव होना है इसीलिए सत्ताधारी दल के नेताओं को मुखिया की चिंता होने लगी है. नीतीश कुमार का शासन 20 सालों से है लेकिन अभी तक टाल मटोल वाला ही रवैया सरकार का रहा है.
”60 दिन में रिव्यू करने का पहले से प्रावधान बना हुआ है. सरकार ने कहा भी है कि 60 दिन में रिव्यू करते हैं लेकिन सरकार क्या रिव्यू करती है सबको पता है. यदि जनप्रतिनिधियों को उनकी सुरक्षा की चिंता होती तो इतना टालमटोल नहीं किया जाता.”– गौतम कृष्णा, राजद विधायक
‘जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर सरकार चिंतित’ : वहीं जदयू विधायक भीष्म कुशवाहा का कहना है नीचे के जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर सरकार चिंतित है. ऐसा नहीं है कि पंचायत चुनाव होने वाला है इसीलिए हो रहा है. वहीं बीजेपी विधायक कृष्ण कुमार मंटू ने कहा कि हम लोग तो मुखिया से ही विधायक बने हैं. मुख्यमंत्री से लेकर गृह मंत्री तक सबका साथ सबका विकास करने में लगे हुए हैं.
‘मुखिया को खुश करने की कोशिश’ : वरिष्ठ पत्रकार सुनील पांडेय का कहना है कि बिहार में मुखिया पर हमले की घटनाएं लगातार होती रहती हैं और कई की हत्या भी हुई है. सुरक्षा को लेकर मुखिया और पंचायत प्रतिनिधियों की तरफ से हथियार का लाइसेंस देने की मांग की जाती रही है. सरकार की तरफ से नियम भी बनाया गया है, 60 दिनों में रिव्यू कर लाइसेंस देने का लेकिन उसपर अमल नहीं होता है. अब इस साल पंचायत का चुनाव होना है ऐसे में मुखिया को खुश करने की भी तैयारी सत्ता पक्ष की तरफ से शुरू हो गई है.


