वाराणसी: महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी और इसके पहले बाबा विश्वनाथ को देश भर के मंदिरों से खास तोहफे मिलना शुरू हो चुके हैं. सबसे पहले वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने माता वैष्णो देवी का खास उपहार बाबा विश्वनाथ के पास भेजा. फिर मथुरा से श्री कृष्ण जन्मभूमि की तरफ से भगवान विश्वनाथ और माता पार्वती के कपड़े, मेवे मिठाइयां और अन्य तरह की चीजें भी बाबा विश्वनाथ को प्राप्त हुईं हैं.
इन सबके बीच 12 फरवरी को मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर का विशेष उपहार भी काशी पहुंचने वाला है. इतना ही नहीं, दक्षिण भारत के 18 से ज्यादा मंदिरों के साथ ही आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, राजस्थान, गुजरात, और असम के मंदिरों से भी बाबा विश्वनाथ को विशेष तोहफे महाशिवरात्रि के मौके पर भेजे जा रहे हैं, जो 15 फरवरी के पहले प्राप्त होंगे.
इस बारे में काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने बताया कि हमने एक नवाचार शुरू किया और उम्मीद नहीं थी कि इसका इतना जबरदस्त फीडबैक मिलेगा. बताया कि हमने विशेष पर्वों पर देश भर के मंदिरों को बाबा विश्वनाथ की तरफ से तोहफे भेजने शुरू किए. रामेश्वरम के साथ तो हमारा वहां के पवित्र जल और यहां के पवित्र जल में एक्सचेंज को लेकर विशेष समझौता भी हुआ और हमने उसे आगे बढ़ाया. उसके बाद अब एक के बाद एक मंदिर हमसे जुड़ रहे हैं. यह बहुत बड़ा संकेत है कि एक साथ विशेष पर्वों पर देश के बड़े मंदिर एक साथ खड़े हो रहे हैं और यह जरूरी भी है यह हमारी परंपरा का हिस्सा रहा है.

उन्होंने बताया कि पहले यह सब होता था, लेकिन बंद हो गई. अब जिस तरह से रिस्पांस मिल रहा है, यह संकेत देता है कि बाबा विश्वनाथ खुद यह चाहते हैं. बताया कि अब तक जो कंफर्मेशन मिली है, उसके मुताबिक आंध्र प्रदेश, तेलंगाना सहित दक्षिण भारत के लगभग 20 से ज्यादा मंदिर हमसे जुड़ रहे हैं और उनके तोहफे मिलने वाले हैं. इसके अतिरिक्त मथुरा, माता वैष्णो देवी के मंदिर से विशेष तोहफे प्राप्त हो चुके हैं. और भी मंदिर हमसे जुड़े हैं, जिसमें राजस्थान, गुजरात और अलग-अलग ज्योतिर्लिंग सहित माता शक्ति उपासना स्थल भी शामिल हैं. इन सभी मंदिरों से शिवरात्रि के मौके पर विशेष उपहार भेजे जा रहे हैं.
कहा कि यह परंपराएं वृहद रूप से जारी रहें, इसका हम विशेष ध्यान रख रहे हैं. जिस उत्साह के साथ मंदिरों की तरफ से हमें तोहफे भेजे जा रहे हैं, उसी उत्साह के साथ हम उन्हें यहां से भी तोहफे दे रहे हैं, ताकि विदाई के दौरान जो हमारी सनातन संस्कृति है, वह भी जारी रहे.


