देहरादून: प्रदेश के ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने आज परेड ग्राउंड में आयोजित ऊन एक्सपो–राष्ट्रीय प्रदर्शनी का रिबन काटकर विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदर्शनी में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन कर ऊन उद्योग से जुड़े उत्पादों, नवाचारों और तकनीकों की जानकारी ली।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने सभी प्रदेशवासियों को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं और आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी केवल उत्पादों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि कृषि, पशुपालन, ग्रामीण आजीविका, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का सशक्त प्रतीक है।
मंत्री ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। ऊन उत्पादन से पर्वतीय, मरुस्थलीय और ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों किसान, पशुपालक, कारीगर और महिलाएं प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई हैं। यह उद्योग आय का साधन होने के साथ-साथ हमारी परंपरा, कौशल और संस्कृति का संवाहक भी है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में ऊन उद्योग को तकनीक आधारित और गुणवत्ता केंद्रित बनाना समय की आवश्यकता है। इसके लिए उन्नत नस्ल विकास, वैज्ञानिक पशुपालन, ऊन की ग्रेडिंग, प्रोसेसिंग और मानकीकरण, आधुनिक मशीनरी, डिजाइन नवाचार तथा अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना आवश्यक है। सरकार इस दिशा में नीतिगत सहयोग, प्रशिक्षण कार्यक्रम और संस्थागत समर्थन लगातार प्रदान कर रही है।
मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि किसान केवल उत्पादक न रहकर मूल्य श्रृंखला का सशक्त भागीदार बने। इसके लिए किसानों को सीधे बाजार से जोड़ना, मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करना तथा सहकारी संस्थाओं और एफपीओ के माध्यम से संगठित ढांचा विकसित करना प्राथमिकता है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल के मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि ऊन उद्योग के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाई जा सकती है। ऊन एक्सपो जैसे राष्ट्रीय आयोजन वैश्विक खरीदारों, निर्यातकों और निवेशकों से जुड़ने का सशक्त माध्यम हैं, जिससे व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और भारत प्राकृतिक रेशा आधारित उद्योगों का वैश्विक केंद्र बन सकेगा। मंत्री ने विश्वास जताया कि ऊन एक्सपो–राष्ट्रीय प्रदर्शनी देश के ऊन उद्योग को नई दिशा, नई गति और नई पहचान प्रदान करेगी।


