Tuesday, January 27, 2026
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बिहार के एक जिले में 7400 से ज्यादा HIV पॉजिटिव, क्या ‘परदेश’ से ला रहे AIDS?

पटना/सीतामढ़ी: दीपक कुमार (बदला हुआ नाम), सीतामढ़ी के रहने वाले हैं. हरियाणा में मजदूरी करते थे. ढाई साल पहले अपने घर पर लौटे तो बीमारी ने जकड़ लिया. घर वाले अस्पताल लेकर पहुंचे, जांच में पाया गया कि दीपक HIV पॉजिटिव हैं. अब दीपक के साथ-साथ उसके परिवार वाले चिंतित हैं कि आगे की जिंदगी कैसे कटेगी?

दीपक अकेले ही नहीं, कई लोग दंश झेल रहे हैं. सीतामढ़ी जिले के 7,400 लोग इस लाइलाज बीमारी से संक्रमित हो चुके हैं. यह आंकड़ा एआरटी (एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी केंद्र) का है, जिसने सबको चौंकाकर रख दिया है. साल 2012 के बाद से यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है. एआरटी में जो संख्या पंजिकृत है, उसके अनुसार पहले 30 से 50 की उम्र के लोग संक्रमित होते थे, लेकिन अब बच्चे भी इसके शिकार हो रहे हैं. दुख की बात तो यह है कि इसमें 400 बच्चे भी शामिल हैं.

केस स्टडी 1: सीतामढ़ी के सुप्पी प्रखंड के एक गांव में एक महिला और उसका बेटा एचआईवी संक्रमित है. महिला का पति दिल्ली में ऑटो चलाता था. महिला का कहना है कि उसका पति एचआईवी संक्रमित था. वह पति के साथ दिल्ली गई थी. पति के संपर्क में आने के कारण वह भी एचआईवी संक्रमित हो गई. इसी दौरान उसने एक बच्चे को भी जन्म दिया और वह भी एचआईवी संक्रमित हो गया. हालांकि स्वास्थ्य विभाग के द्वारा मिल रहे दवा के खाने से वह और उसका बच्चा ठीक है.

केस स्टडी 2: सीतामढ़ी जिले के परिहार प्रखंड के गांव में अरब देश में मजदूरी करने वाले एक व्यक्ति जब वहां से आया तब उसे जांच के दौरान एचआईवी पॉजिटिव पाया गया. उसके साथ-साथ उसकी पत्नी भी एचआईवी पॉजिटिव पायी गयी. अब पति-पत्नी स्वास्थ्य विभाग के द्वारा दी जा रही दवा को खा रहे हैं. पति का कहना है कि समय रहते अगर वह सजग रहता तो आज यह दिन नहीं देखना पड़ता.

केस स्टडी 3 : सीतामढ़ी जिले के भारत नेपाल की सीमा बैरगनिया के गांव के रहने वाला एक व्यक्ति, उसकी पत्नी और बच्ची भी एचआईवी पॉजिटिव पायी गयी हैं. पति मजदूरी करने पड़ोसी देश नेपाल के काठमांडू में रहता था, वहीं उसे एचआईवी का संक्रमण हो गया. वह जब अपने गांव आया तो पत्नी के संपर्क में आने के कारण पत्नी को और उसके बाद गर्भावस्था के दौरान बच्चा भी एचआईवी पॉजिटिव हो गया.

एचआईवी पॉजिटिव मजदूर का कहना है कि जिन लोगों को जानकारी है कि हम पूरा परिवार एचआईवी पॉजिटिव हैं, वे लोग हमें हीन भावना से देखते हैं. कई लोग बातें करने से भी कतराते है, जबकि जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है कि यह छुआछूत की बीमारी नहीं है. बावजूद इसके अभी भी लोग पुरानी मानसिकता के कारण हमसे दूर रहते हैं.

”चूंकि कई लोग दूसरे प्रदेश में काम करने के लिए जाते हैं, उसके कारण भी संख्या बढ़ी है. यही नहीं पड़ोसी देश नेपाल का सीमा खुला हुआ है. इस कारण लोग आसानी से आते जाते हैं, इससे भी मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी का अंदेशा जताया जा रहा है. अभी हमारे यहां 5 हजार पेशेंट हैं जो दवा ले रहे हैं.”– डॉ अखिलेश कुमार, सिविल सर्जन, सीतामढ़ी

97 हजार से ज्यादा बिहार में HIV पीड़ित : बिहार राज्य एड्स कंट्रोल सोसायटी के अपर परियोजना निदेशक डॉ नरेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि राज्य में एचआईवी पॉजिटिव एक्टिव मरीजों की संख्या अभी के समय 97046 है. सीतामढ़ी में जो एचआईवी मरीज एआरटी की दवा TLD पर सरवाइव कर रहे हैं, वैसे मरीजों की संख्या 4957 है. जिसमें 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों की संख्या 341 हैं.

क्या बोले स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय? : सीतामढ़ी में मिले 7400 HIV मरीज पर बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि HIV के लिए सरकार ने अलग से बिहार एड्स कंट्रोल सोसाइटी की स्थापना की है. इसका काम ही लोगों में इस रोग के प्रति जागरूकता फैलाना है.

”लगातार इसको लेकर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है. जिस क्षेत्र में ये मरीज मिले हैं, इसकी जांच कराई जा रही है. किन परिस्थिति में ये मरीज बढ़े हैं, इसपर एड्स सोसाइटी काम कर रही है. स्वास्थ्य विभाग मामले की मॉनिटरिंग कर रहा है.” – स्वास्थ्य मंत्री, मंगल पांडेय

अब तक लगभग 7400 लोग संक्रमित: सीतामढ़ी में अनुमानित आंकड़े की बात करें तो 7400 हजार से ज्यादा लोग एचआईवी से संक्रमित हुए. यह संख्या 2012 से लेकर अब तक की है. डुमरा प्रखंड से सबसे अधिक और चोरौत प्रखंड में सबसे कम मामले सामने आए. हालांकि एआरटी सेंटर के अनुसार एक्टिव मरीजों की संख्या 4900 के आसपास है.

400 नाबालिग संक्रमित: 18 साल से कम उम्र के करीब 400 संक्रमित हैं. इन संक्रमितों में लड़का-लड़की दोनों शामिल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक 252 लड़का और 135 लड़कियां संक्रमित हैं. एआरटी सेंटर के डॉ. मो. हसीन अख्तर ने कहा कि अगर दंपती में से कोई भी या दोनों संक्रमित हैं तो बगैर डॉक्टर की सलाह बच्चों का प्लान नहीं करें. यही कारण बच्चे भी संक्रमित हो जाते हैं.

क्या है ART: जिले में 2012 में एआरटी सेंटर खोला गया था. एआरटी (ART) सेंटर यानि एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी केंद्र. इसका काम एचआईवी/एड्स पीड़ित लोगों को मुफ्त में दवा, सलाह और देखभाल करना है, ताकि संक्रमित लोग सामान्य जीवन जी सके.

अब तक करीब 7900 संक्रमित: एआरटी सेंटर खुलने से अब तक करीब 7900 मरीज निबंधित हुए. इसमें 4900 के आसपास एआरटी सेंटर से दवा और सलाह ले रहे हैं. नोडल पदाधिकारी डॉ. जेड जावेद के अनुसार 2022 से अब तक प्रतिवर्ष 500 नए मरीजों का निबंधन हो रहा है. एआरटी सेंटर के डॉ. मो. हसीन अख्तर ने बताया कि यहां से प्रतिदिन 300 मरीजों को दवा दी जा रही है. इसके अलावे अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं.

“एचआईवी से जिले में भयावह स्थिति है. 400 बच्चे भी संक्रमित हो चुके हैं. जिला प्रशासन इसको लेकर सोशल वर्कर के माध्यम से जागरूकता अभियान चला रहा है. संक्रमित लोगों को दवा एक दिन भी नहीं छोड़ने की सलाह दी जा रही.” –डॉ. मो. हसीन अख्तर, एआरटी सेंटर

पीड़ितों को सुविधा: नोडल पदाधिकारी ने बताया कि जिले में हर संक्रमित लोगों को सरकारी सुविधा दी जा रही है. एआरटी सेंटर से दवा दी जा रही है. जिनका बिहार शताब्दी एड्स पीड़ित कल्याण योजना के तहत रजिस्ट्रेशन हो चुका है, ऐसे कुल 3899 मरीजों को प्रतिमाह 1500 रुपये दिया जा रहा है. 18 साल से कम उम्र के संक्रमितों के लिए परवरिश योजना के तहत प्रति माह 1000 रुपये दिये जा रहे हैं.

“हर व्यक्ति को जांच करानी चाहिए कि उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव है या निगेटिव. रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर एआरटी सेंटर में निबंधन करा लेना चाहिए और दवा का सेवन करना चाहिए. इसके अलावे प्रत्येक महीने काउंसलिंग कराना अनिवार्य है.” डॉ. जावेद, नोडल पदाधिकारी

एड्स क्या है?: एड्स (Acquired Immunodeficiency Syndrome) एचआईवी (Human Immunodeficiency Virus) संक्रमण का सबसे गंभीर और लाइलाज बीमारी है. इसे दवा से रोकथाम किया जा सकता है, लेकिन खत्म नहीं किया जा सकता. यानि मरीज पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकता.

HIV क्या है? : एचआईवी यानी ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस, यह वायरस शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर हमला करता है और उसे धीरे-धीरे कमजोर कर देता है. यह वायरस शरीर के CD4 सेल्स को नष्ट करता है जिनकी भूमिका शरीर को संक्रमण से बचाने में सबसे महत्वपूर्ण होती है. यदि इलाज न मिले तो यह वायरस शरीर को पूरी तरह कमजोर कर देता है.

कैसे फैलता है?: इसके फैलने के कई कारण हैं. इसमें असुरक्षित यौन संबंध, रक्त संपर्क जैसे दूषित इंजेक्शन, इस्तेमाल किए हुए सीरिंज का फिर से इस्तेमाल करना शामिल है. इसके अलावे मां से बच्चों में भी फैल सकता है. अगर माता-पिता को है तो मां के द्वारा स्तनपान कराने से बच्चों को एचआईवी हो सकता है.

पलायन है जिम्मेदार..! : बिहार राज्य एड्स कंट्रोल सोसायटी के अपर परियोजना निदेशक डॉ नरेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि इसका प्रमुख कारण पलायन है. चूंकि बड़ी संख्या में लोग लेबर क्लास में कमाने के लिए दूसरे प्रदेश में जाते हैं. सेक्स बॉडी की जरूरत है और इस जरूरत को पूरी करने के लिए लोग गलत जगह पर चले जाते हैं. ऐसी जगह जाते हैं तो अनप्रोटेक्टेड सेक्स करते हैं जो संक्रमण का कारण बनता है.

संक्रमण एक बार होता है तो जब वह अपने घर आता है और अपने पत्नी के साथ रिलेशनशिप में आता है तो उसकी पत्नी भी इनफेक्टेड हो जाती है. महिला इनफेक्टेड होती है तो उसके शिशु में एचआईवी इंफेक्शन होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है.

HIV के फैलने के कारण : डॉ नरेंद्र गुप्ता ने बताया कि एचआईवी संक्रमण के चार प्रमुख कारण हैं. पहला कारण है अन प्रोटेक्ट सेक्स. इसमें लोग अपने पार्टनर के साथ लॉयल न रहकर मल्टीपल पार्टनर के साथ सेक्स करते हैं और कंडोम का इस्तेमाल नहीं करते हैं. अगर शरीर की जरूरत है और मल्टीपल पार्टनर के साथ सेक्स कर रहे हैं तो कंडोम का इस्तेमाल बहुत ही अनिवार्य हो जाता है. इसके अलावा पुरुष और पुरुष के बीच बिना प्रोटेक्शन के सेक्स संक्रमण फैलने का प्रमुख कारण बन जाता है.

दूसरा कारण है इनफेक्टेड ब्लड. अगर किसी को ब्लड चढ़ता है वह इनफेक्टेड ब्लू हो तो काफी दिक्कत हो जाती है. अगर कोई एचआईवी से संक्रमित हुआ है तो शुरुआती 3 महीना में उसके ब्लड में संक्रमण का लेवल पता नहीं चल पाता है. कुछ मशीन उपलब्ध हो गई है जो 15 दिन में ब्लड की जेनेटिक रिपोर्टिंग करके एचआईवी वायरस की स्थिति बता देती हैं लेकिन अभी भी यह ब्लड बैंकों में सभी जगह उपलब्ध नहीं है.

इसके अलावा तीसरा प्रमुख कारण है इनफेक्टेड नीडल का इस्तेमाल करना. ड्रग्स लेने वाले लोगों में इससे एचआईवी संक्रमित होने का खतरा काफी बढ़ जाता है. चौथा कारण है मां से शिशु. मां यदि एचआईवी संक्रमित है और वायरल लोड 1000 से अधिक है तो शिशु में संक्रमण होने का पूरा खतरा रहता है.

इसके लक्षण: एड्स होने के कई लक्षण शरीर में देखने को मिलते हैं. इसमें बुखार, थकान, रात को पसीना आना, गले में खराश, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, लिम्फ नोड्स, यानि गर्दन, कंधा और कमर में दर्ज के साथ सूजन, त्वचा पर धब्बा होना. बिना कोई एक्सराइज के तेजी से वजन घटना आदि लक्षण हो सकते हैं. भूख ना लगना भी हो सकता है.

डॉक्टरों की सलाह: आमतौर पर इस तरह के लक्षण सामान्य तौर भी होता है, लेकिन लंबे समय तक रहे तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लेना चाहिए. इसकी जांच कराएं, अगर समय से बीमारी का पता चल जाए तो दवा के माध्यम से इसे रोका जा सकता है. शादी से पहले लड़का-लड़की एचआईवी जांच जरुर करा लें. इससे संक्रमण फैलने का खतरा कम हो जाता है.

”एचआईवी अब के दौर में लाइफस्टाइल डिजीज का एक रूप बन गया है. एचआईवी पेशेंट अगर नियमित रूप से प्रतिदिन एक नियमित समय पर दवाइयों का सेवन करें तो स्वस्थ और बेहतर जीवन जी सकते हैं. हालांकि एचआईवी पॉजिटिव सेक्स करना चाहते हैं तो प्रोटेक्शन के रूप में कंडोम का इस्तेमाल अनिवार्य है. यदि ऐसा नहीं करते हैं तो किसी एक पार्टनर की स्थिति बिगड़ सकती है जिसका वायरल लोड अधिक होगा.” डॉ नरेंद्र गुप्ता, अपर परियोजना निदेशक, बिहार राज्य एड्स कंट्रोल सोसायटी

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